IAS अभिषेक प्रकाश भ्रष्टाचार पटकथा, एक्शन के बाद से हो गए हैं अंडरग्राउंड
अभिषेक प्रकाश ने कमीशन निकांत जैन के जरिए बिजनेसमैन से डिमांड की थी। बिजनेसमैन विश्वजीत दत्ता ने इसकी शिकायत सीएम योगी से की। सीएम ने मामले की STF से जांच कराई थी। इसके बाद एक्शन लिया।
IAS अभिषेक जहां तैनात रहे, वहीं बनाई प्रॉपर्टी:700 बीघा जमीन, लखनऊ में कई बंगले; ब्रह्मोस मिसाइल फैक्ट्री के नाम पर 20 करोड़ का घोटाला किया
यूपी के सीनियर IAS अधिकारी अभिषेक प्रकाश को सस्पेंड कर दिया गया है। अभिषेक ने सोलर इंडस्ट्री प्रोजेक्ट की मंजूरी के लिए बिजनेसमैन से 5 फीसदी कमीशन मांगा था। कमीशन न मिलने पर प्रोजेक्ट की फाइल रोक दी।
अभिषेक प्रकाश ने कमीशन निकांत जैन के जरिए बिजनेसमैन से डिमांड की थी। बिजनेसमैन विश्वजीत दत्ता ने इसकी शिकायत सीएम योगी से की। सीएम ने मामले की STF से जांच कराई थी। इसके बाद एक्शन लिया।
सूत्रों के मुताबिक, IAS अभिषेक जहां भी तैनात रहे, वहां पर उन्होंने प्रॉपर्टी बनाई। लखीमपुर और बरेली में 700 बीघा जमीन खरीदी। लखनऊ में कई बंगले बनवाए। उन पर ब्रह्मोस मिसाइल फैक्ट्री के नाम पर 20 करोड़ के घोटाले का आरोप भी लगा है।
अभिषेक औद्योगिक विकास विभाग के सचिव और इन्वेस्ट यूपी के CEO थे। एक्शन के बाद से अंडरग्राउंड हो गए हैं। उनके करीबी बाबू निकांत जैन को STF ने गिरफ्तार किया है। अभिषेक प्रकाश 31 अक्टूबर 2019 से 7 जून 2022 तक लखनऊ के जिलाधिकारी रहे। इसके अलावा, 23 अक्टूबर 2020 से 25 जुलाई 2021 तक उन्होंने LDA के वीसी की जिम्मेदारी भी संभाली।
अभिषेक ने कहां-कहां भ्रष्टाचार किया, 6 पॉइंट
1. डिफेंस कॉरिडोर जमीन घोटाला: नियमों को ताक पर रखकर खेल लखनऊ के भटगांव में डिफेंस कॉरिडोर के लिए अधिग्रहीत जमीन के मामले में भी तत्कालीन डीएम अभिषेक प्रकाश की भूमिका संदिग्ध पाई गई थी। भू-अधिग्रहण समिति के अध्यक्ष रहते हुए उन्होंने तहसील प्रशासन के साथ मिलकर जमीनों की दरें मनमाने तरीके से तय की। 1984 में एससी वर्ग के लिए आवंटित जमीन को गलत तरीके से विक्रय योग्य बनाया। भूमि खरीद-फरोख्त में दलालों और अधिकारियों की मिलीभगत से 20 करोड़ का मुआवजा उठाया गया। शासन को दी गई जांच रिपोर्ट में तत्कालीन डीएम को जिम्मेदार ठहराया गया है।
2- LDA वीसी रहते हुए धांधली लखनऊ विकास प्राधिकरण (LDA) के उपाध्यक्ष रहते हुए अभिषेक प्रकाश पर कई बिल्डरों को फायदा पहुंचाने और मनमाने तरीके से सीलिंग व लाइसेंस जारी करने के आरोप लगे। सूत्रों के मुताबिक, LDA वीसी रहते उन्होंने कई अवैध निर्माण गिरवाए, लेकिन अपने करीबी बिल्डरों को लाभ पहुंचाया। आशियाना समेत कई इलाकों में मनपसंद बिल्डर्स को लाइसेंस जारी किए। एलडीए अधिकारियों से मिलीभगत कर बिल्डरों की फाइलें लटकाने के भी आरोप हैं।
3.भ्रष्टाचार की कड़ी: अलीगढ़, लखीमपुर और हमीरपुर में भ्रष्टाचार के आरोप अभिषेक प्रकाश अलीगढ़, लखीमपुर खीरी और हमीरपुर में डीएम रहे चुके हैं। उनके खिलाफ अलीगढ़ में जमीन खरीद-बिक्री में धांधली की शिकायतें थीं। लखीमपुर में सरकारी टेंडरों में हेरफेर और हमीरपुर में खनन माफियाओं से साठगांठ के आरोप लगे थे।
4. STF जांच के बाद एक्शन, बचाने की भी हुई थी कोशिश सूत्रों के मुताबिक, एसटीएफ की रिपोर्ट कई दिनों तक शासन में घूमती रही। कुछ अधिकारियों ने अभिषेक प्रकाश को बचाने की कोशिश भी की, लेकिन मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ ने किसी तरह की रियायत देने से इनकार कर दिया। इसके बाद तत्काल सस्पेंशन का आदेश जारी कर दिया गया।
5. आलीशान संपत्तियां और लाइजनिंग सिंडिकेट का नेटवर्क सूत्रों के मुताबिक, अभिषेक प्रकाश ने लखनऊ में डीएम रहते हुए कई बेशकीमती संपत्तियां जुटाईं। अंसल में एक घर, आशियाना में कोठी और एक सोसाइटी में विला होने की बात सामने आई है। बिचौलिए निकांत जैन और लकी जाफरी से करीबी संबंध थे, जो IAS अधिकारियों के लिए लाइजनिंग करता था। निकांत और जाफरी ने कई बार महत्वपूर्ण प्रोजेक्ट्स की फाइलों को क्लियर कराने के लिए कमीशन डील कराई।
6- दो जिलों में डीएम रहते 700 बीघा जमीन खरीदने के आरोप अभिषेक प्रकाश पर लखीमपुर खीरी और बरेली में 700 बीघा जमीन अपने परिवार के नाम खरीदने के भी आरोप हैं। यह जमीन आईएएस अभिषेक ने अपने परिजन (माता, पिता व भाई के अलावा कुछ फर्जी कंपनियां बनाकर) के नाम खरीदी हैं। इसी तरह बरेली में 400 बीघा जमीन खरीदने का भी आरोप है। दोनों जगहों पर स्टांप ड्यूटी में चोरी के भी आरोप हैं। DOPT ने यूपी सरकार को इस पूरे मामले की जांच के लिए लिखा।
अभिषेक प्रकाश के कार्यकाल के कई अहम फैसले रडार पर सरकार वरिष्ठ आईएएस अधिकारी अभिषेक प्रकाश के विभिन्न पदों पर कार्यकाल की विजिलेंस से जांच कराएगी। अभिषेक प्रकाश लखनऊ, बरेली, अलीगढ़, हमीरपुर सहित कई जिलों में डीएम रह चुके हैं, इसके अलावा उन्होंने एनईडीए, नेशनल हेल्थ मिशन, गृह विभाग और लखनऊ विकास प्राधिकरण (LDA) जैसे महत्वपूर्ण पदों पर कार्य किया है। सूत्रों के मुताबिक, उनके कार्यकाल के दौरान किए गए प्रशासनिक फैसले और वित्तीय लेनदेन जांच के दायरे में आ सकते हैं।
इन कार्यकालों की होगी जांच
लखीमपुर खीरी – डीएम (2011-2012)
बरेली – डीएम (2012-2014)
अलीगढ़ – डीएम (2014-2015)
हमीरपुर – डीएम (2018-2019)
लखनऊ – डीएम (2019-2022) सबसे लंबा कार्यकाल
महत्वपूर्ण प्रशासनिक पदनेशनल हेल्थ मिशन, यूपी (2015)
एनईडीए निदेशक और विशेष सचिव (2016)
मेरठ में पश्चिमांचल विद्युत वितरण निगम के एमडी (2016-2017)
गृह विभाग में विशेष सचिव (2017-2018)
लखनऊ विकास प्राधिकरण (LDA) के उपाध्यक्ष (2020-2021)
यूपी इन्वेस्टमेंट के CEO रहते क्या-क्या कियाइन्वेस्ट यूपी में भ्रष्टाचार: निवेशकों की फाइलें रोकीं, पैसे के बिना मंजूरी नहीं दी गई।
अयोध्या-वाराणसी प्रोजेक्ट रोके: इन शहरों में विकास परियोजनाओं से जुड़ी फाइलें लटकाईं।
डिफेंस कॉरिडोर घोटाला: लखनऊ के भटगांव में जमीन अधिग्रहण घोटाले में नाम आया।
अब की जांच रिपोर्ट में खुलासा हुआ कि अभिषेक प्रकाश ने अयोध्या और वाराणसी में महत्वपूर्ण प्रोजेक्ट्स को फंसा रखा था।
सरकार की प्राथमिकता वाले इन शहरों में निवेश रोकने को लेकर कई शिकायतें मिली थीं।
कौन-कौन जांच के दायरे मेंनिकांत जैन – IAS अधिकारियों के लिए लाइजनिंग करता था, निवेशकों से डील करता था।
लकी जाफरी – सिंडिकेट का हिस्सा, घोटालों में शामिल।
फार्मा कॉलेज संचालक – ED की जांच में 100 करोड़ के छात्रवृत्ति घोटाले में नाम।
STF की जांच अभी जारी है, कई और खुलासे हो सकते हैं।
अब आगे क्या होगा अभिषेक प्रकाश को राजस्व परिषद से संबद्ध कर दिया गया है। बिना अनुमति मुख्यालय नहीं छोड़ सकेंगे। सरकार आगे की जांच में और कड़ी कार्रवाई कर सकती है। उनके अलीगढ़, लखीमपुर और अन्य जिलों में किए गए कार्यकालों की भी जांच शुरू हो सकती है।
