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घोटाले की रिपोर्टिंग का पत्रकार को को मिला इनाम, 12 घंटे में जेल

पीड़ित पत्रकार दीपक पंडित को उनके साथी पत्रकारों और वकीलों का भरपूर समर्थन मिल रहा है। स्थानीय वकीलों ने इस गिरफ्तारी को अन्यायपूर्ण बताते हुए उनका पक्ष निशुल्क न्यायालय में रखा।

पत्रकारों में आक्रोश, प्रेस रिलीज तक जारी नहीं की गई

वकीलों का समर्थन, न्याय के लिए संघर्ष जारी

पुलिस की चुप्पी और प्रशासन की उदासीनता

मुख्यमंत्री से शिकायत वापस न लेने की सजा?

कोतवाली मोहम्मदी के हरिहरपुर गांव निवासी रामदीप, जो बिजुआ ब्लॉक में संविदा कंप्यूटर ऑपरेटर हैं, ने दीपक पंडित पर दो लाख रुपये की रंगदारी मांगने, ब्लैकमेल करने और झूठे मुकदमे में फंसाने की धमकी देने का आरोप लगाया था। उनकी शिकायत पर पुलिस ने गुरुवार रात दीपक को हिरासत में लिया और शुक्रवार को कोर्ट में पेश कर दिया।

सीतापुर। सीतापुर जिले में एक पत्रकार की गिरफ्तारी ने स्थानीय पत्रकारों और समाज में रोष पैदा कर दिया है। पत्रकार दीपक पंडित को पुलिस ने मात्र 12 घंटे के भीतर जेल भेज दिया, लेकिन अब तक स्पष्ट रूप से यह नहीं बताया गया कि उन्हें किस मामले में गिरफ्तार किया गया।
पीड़ित पत्रकार दीपक पंडित को उनके साथी पत्रकारों और वकीलों का भरपूर समर्थन मिल रहा है। स्थानीय वकीलों ने इस गिरफ्तारी को अन्यायपूर्ण बताते हुए उनका पक्ष निशुल्क न्यायालय में रखा। इस सहयोग के लिए सभी वकील साथियों को साधुवाद दिया जा रहा है।
इस पूरे मामले में पुलिस प्रशासन की भूमिका संदेह के घेरे में आ गई है। एसपी महोदय अब तक इस मामले पर कोई ठोस बयान नहीं दे पाए हैं, वहीं पीआरओ भी यह स्पष्ट नहीं कर सके कि आखिरकार पत्रकार पर कौन सा मामला दर्ज किया गया है। पुलिस की इस चुप्पी से मामला और अधिक संदिग्ध हो गया है।
पत्रकार दीपक पंडित हाल ही में करोड़ों के एक घोटाले की रिपोर्टिंग कर रहे थे और उन्होंने मुख्यमंत्री महोदय को इस विषय में शिकायत भी भेजी थी। माना जा रहा है कि इसी शिकायत को वापस न लेने की सजा के रूप में उन पर फर्जी मुकदमा दर्ज कर जेल भेजा गया है।
स्थानीय पत्रकारों का कहना है कि प्रशासन की ओर से इस मामले में कोई प्रेस रिलीज तक जारी नहीं की गई, जिससे संदेह और गहरा हो गया है। पत्रकार संगठनों ने इस कार्रवाई को प्रेस स्वतंत्रता पर हमला बताया है और जल्द से जल्द न्याय की मांग की है।
आगे की राह,यह मामला अब न्यायालय के समक्ष पहुंच चुका है, लेकिन पत्रकार दीपक पंडित और उनके सहयोगी अब भी न्याय के लिए लड़ाई लड़ रहे हैं। वकीलों और पत्रकारों का मानना है कि यदि इस तरह से सच्चाई की आवाज़ को दबाया जाता रहा, तो निष्पक्ष पत्रकारिता खतरे में पड़ जाएगी।
इस पूरे घटनाक्रम ने एक बार फिर सवाल खड़ा कर दिया है कि क्या हमारे देश में निष्पक्ष पत्रकारिता संभव है, या फिर सत्ता के दबाव में सच की आवाज़ को इसी तरह कुचला जाता रहेगा?

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