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अधिवक्ता, साहित्यकार और पत्रकार ही लोकतंत्र के वास्तविक संरक्षक

दिनकर दर्शन साहित्य प्रवाह की अध्यक्षा एवं नेशनलिस्ट कांग्रेस पार्टी (अजीत पवार गुट) की लखनऊ जिला उपाध्यक्ष शरद सिंह शरद के संयोजन में, लखनऊ बार एसोसिएशन के कैसरबाग स्थित सभागार में एक भव्य सम्मान समारोह का आयोजन किया गया। इस अवसर पर साहित्य, अधिवक्ता समुदाय और पत्रकारिता जगत से जुड़ी कई प्रतिष्ठित हस्तियाँ उपस्थित रहीं।
मुख्य वक्ता के रूप में उपस्थित लखनऊ विश्वविद्यालय के पूर्व हिंदी विभागाध्यक्ष डॉ हरिशंकर मिश्र ने कहा कि “साहित्य और कानून का एक गहरा संबंध है। अनेक अधिवक्ताओं ने साहित्य को नई ऊंचाइयां दी हैं-महामना मदन मोहन मालवीय उनमें से एक हैं।” उन्होंने कहा कि “वही साहित्य सच्चा है जिसमें जीवन-मूल्य और मानवता का समावेश हो।”
वरिष्ठ पत्रकार अनुपम चौहान ने कहा कि “साहित्यकार, अधिवक्ता और पत्रकार तीनों ही समाज के दर्पण हैं। साहित्यकार दिशा दिखाता है, अधिवक्ता न्याय दिलाता है, और पत्रकार समाज की निगरानी करता है।” अपनी बात चार पंक्तियों में रखते हुए कहा-
हक़ की लड़ाई लड़ते हैं, हर झूठ को मात देते हैं,
वो वकील हैं जनाब, जो कानून को ज़ुबान देते हैं।
क़लम नहीं, दलीलों का हथियार चलाते हैं,
वकील हैं हम, सच को पहचान दिलाते हैं।
दलीलों के मोर्चे पर वो योद्धा कहलाते हैं,
वकील हैं, हर हक़ की जंग जीत दिखाते हैं।
कार्यक्रम के अंत में लखनऊ बार एसोसिएशन अध्यक्ष रमेश प्रसाद तिवारी ने कहा कि “ऐसे आयोजन युवा अधिवक्ताओं को ऊर्जा प्रदान करते हैं और वरिष्ठ अधिवक्ताओं में सहयोग व शालीनता की भावना को प्रोत्साहित करते हैं।” उन्होंने समिति को भविष्य में ऐसे आयोजनों के लिए पूर्ण सहयोग का आश्वासन दिया। उन्होंने कहा, अधिवक्ता शरद मिश्र सिंधु ने लगभग तीस वर्ष पूर्व अधिवक्ता पेंशन योजना का विचार प्रस्तुत किया था, जो आज व्यापक रूप से सबकी ज़ुबान पर है। उन्होंने संस्था के साथ सदैव जुड़े रहने का संकल्प भी दोहराया। अधिवक्ता शरद मिश्र सिंधू ने संस्था की ओर से अतिथियों का स्वागत फूलमाला, शॉल और मोमेंटो भेंट कर किया।
इस अवसर पर लखनऊ बार एसोसिएशन अध्यक्ष रमेश प्रसाद तिवारी, महामंत्री ब्रजभान सिंह भानू, डॉ. हरिशंकर मिश्र, वरिष्ठ पत्रकार अनुपम चौहान, केसरिया स्वर की प्रधान संपादक शरद सिंह शरद, यूपी एनसीपी अध्यक्ष हरिश्चंद्र सिंह, रामकुमार गुप्ता, शरद मिश्र सिंधू, एडवोकेट मीनाक्षी वर्मा, वरिष्ठ पत्रकार अनुपम पांडेय, वरिष्ठ पत्रकार एस.वी. सिंह, प्रेम प्रकाश शुक्ला, रचना मिश्र रिया, कामिनी ओझा, दुर्गेश यादव, रूपेश तिवारी, केडी मिश्र, अर्जुन त्रिपाठी, आलोक दीक्षित, प्रशांत त्रिपाठी, अनुमेष मिश्रा, अजय यादव, भूपेंद्र मणि सिंह, हरि प्रकाश अग्रवाल ‘हरी’, अनिल किशोर शुक्ल ‘निडर’, अरविंद रस्तोगी, स्वाति पांडे, आरपी सिंह, अर्श लखनवी सहित अनेक साहित्य प्रेमी एवं अधिवक्ता मौजूद रहे।
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