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मान्यता प्राप्त संवाददाताओं ने सड़क पर बैठकर समानांतर संगठन बना लिया

धूमिल ने अर्सा पहले किताब लिखी थी संसद से सड़क तक। पत्रकारों के इस गुट ने विधानसभा से सड़क तक वाली नई लकीर खींच दी।

मान्यता प्राप्त संवाददाताओं ने सड़क पर बैठकर समानांतर संगठन बना लिया। संगठन बनाने वालों को बहुत बधाई।

धूमिल ने अर्सा पहले किताब लिखी थी संसद से सड़क तक। पत्रकारों के इस गुट ने विधानसभा से सड़क तक वाली नई लकीर खींच दी।

सरकार भी यही चाहती है। कि बंटे रहो, लड़ते रहो, कोई डिमांड रखने की औकात में न रहो।

शबाहत हुसैन ‘विजेता’ 

अखिलेश यादव ने अपनी सरकार जाने से कुछ दिन पहले मान्यता प्राप्त पत्रकारों की बैठक बुलाई थी। तब दो संगठन थे। एक के अध्यक्ष हेमन्त तिवारी थे, दूसरे के प्रांशु मिश्रा।

जो लोग उस बैठक में थे उन्हें याद होगा कि अखिलेश यादव ने तंज किया था कि आप लोग तो हमसे भी ज्यादा राजनीति करते हो।

उस बैठक में अखिलेश यादव ने 20 साल की क़िस्त पर मकान देने की बात कही थी। आज तक किसी को मकान नहीं मिला क्योंकि सब आपस में ही लड़ते रहे।

पत्रकारों के बीच मान्यता और ग़ैर मान्यता की भी लड़ाई है। आपस मे जबरदस्त गुटबाजी है। आईएफडब्ल्यूजे के भी दो गुट हैं। श्रमजीवी पत्रकार संघ के भी दो गुट हैं। हर कोई प्रेस क्लब पर भी कब्जा चाहता है। हद तो यह है कि मान्यता प्राप्त संवाददाता समिति के समानांतर गैर मान्यता प्राप्त संवाददाता समिति बनाने की भी तैयारी है।

पत्रकारों की समस्याओं पर बात करने को कोई तैयार नहीं। लगातार घटती इज्जत कैसे बचे इस पर सोचने की फुर्सत नहीं, हर प्रेस कांफ्रेंस में 50 रुपये से 500 रुपये वसूली करने वाले कथित पत्रकार गैंग से निबटने की हिम्मत किसी के पास नहीं।

यूट्यूब पर खबर चलाने के एवज में पैसे मांगने वालों के बारे में सोचने की किसी के पास फुर्सत नहीं।

चौथे स्तम्भ तो आप वैसे भी नहीं रहे क्योंकि जिसकी सरकार उसका राग अलापना है। खोज परक खबरें लिखने और छपने का सिलसिला टूट रहा है। इसी वजह से नेता भरी प्रेस कांफ्रेंस में जलील कर रहा है। कोई पूछने वाला नहीं बचा है। खुद की तारीफें फेसबुक पर लिखकर खुश हो लो यह अलग बात है।

जिस दौर में बुलडोजर से लैस सरकार भी बंटोगे तो कटोगे का नारा दे रही है उस दौर में नाली के किनारे बैठकर संगठन बना रहे हो। बेहतर होता कि चुनाव का दबाव बनाते, लड़ते और जीत जाते।

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