मान्यता प्राप्त पत्रकारों को मिली राहत, समीक्षा बैठक में ख़ास वर्ग को नही किया टारगेट

डा. मोहम्मद कामरान (स्वतंत्र पत्रकार)

उत्तर प्रदेश के प्रयागराज में अतीक-अशरफ के हत्यारों ने मीडिया का रूप क्या धारण किया पत्रकारों के एक बड़े वर्ग में सनसनी, घबराहट दिखाई देने लगी और इस दहशत का मुख्य कारण सूचना विभाग द्वारा निर्गत की गई पत्रकार मान्यता समाप्त किये जाने का खतरा था जबकि अतीक़ के हत्यारों के पास न तो प्रेस मान्यता का कार्ड मिला था और न ही किसी प्रमुख चौनल का पहचान पत्र परंतु लोकतंत्र के चौथे स्तंभ पर प्रहार करने के लिए सरकारी तंत्र को पर्याप्त आधार मिला था।
आनन फ़ानन में सूचना विभाग के अधिकारियों द्वारा मान्यताओं को जांचने-परखने हेतु दर्जन भर सदस्यों को नामित कर कमेटी का गठन करके राज्य मुख्यालय के मान्यता प्राप्त पत्रकारों की समीक्षा को लेकर दिशानिर्देश जारी क्या हुए, समाज को आइना दिखाते कलमकार घबराए नजर आने लगे और अपनी अपनी मान्यताओं को बचाने के लिए जुगाड़ लगाने लगे, वहीं पत्रकारिता जगत के वट वृक्ष एवं श्रमजीवी पत्रकार संगठनों के जनक द्वारा सोशल मीडिया के माध्यम से मांग पत्र जारी करते हुए मीडिया को गटर में जाने से रोकने हेतु सरकारी मान्यता नियम लागू करते हुए अपनी मान्यता की समीक्षा का मांगपत्र भी जारी कर दिया गया। फ्रीलान्स दुबे जी ने मान्यता प्रकरण और नियमावली पर ही संदेह जताते हुए सूचना निदेशक से पत्रकारों की मान्यता की जांच किये जाने पर ज़ोर दिया तो किसी उर्दू संघठन द्वारा सूचना निदेशक के समक्ष साक्ष्यों को संलग्न करते हुए मान्यता प्राप्त पत्रकारों की मान्यता निरस्त करने की मांग की गयी जिसपर कार्यवाही करते हुए अंततः सूचना निदेशक द्वारा लोकतंत्र के चौथे स्तंभ की गरिमा को बचाए रखने के लिए एक बैठक आहूत की गई परन्तु कुछ देर चली बैठक की समाप्ति पर किसी सम्मानित सदस्य द्वारा एक खास वर्ग के लोगों की मान्यता की समीक्षा की बात को हवा में उछाला परंतु उनकी बात हकीकत से कोसों दूर है।
मान्यताओं की समीक्षा हेतु प्रस्तावित बैठक के निर्णय की सूचना प्राप्त होते ही मेरे द्वारा स्वयं सूचना निदेशक के सम्मुख लिखित रुप से मान्यता की समीक्षा किये जाने का अनुरोध किया गया था क्योंकि विगत कई दिनो से संसद सदस्य, मंत्री, विधायक एवं अन्य गणमान्य व्यक्तियों द्वारा मेरी मान्यता को लेकर अनेक पत्र जारी किये गये थे जबकि उत्तर प्रदेश में आमजनमानस की अवधारणा है कि योगी सरकार मेे सुनवाई है, फिर बाहुबली सांसद बृजभूषण शरण सिंह कि क्या मजबूरी है जो मुख्यसचिव कार्यालय पर अकूत सम्पति के आगे नतमस्तक की दुहाई देते हुए पत्रकार की मान्यता समाप्त किये जाने हेतु खतों किताबत की जंग छेड़़ी हुई है।
कैसरगंज लोकसभा क्षेत्र के सांसद द्वारा अनर्गल, आधारहीन आरोपो का पुलिंदा लिखते हुए समाज के चौथे स्तंभ के खिलाफ मोर्चा खोला है। ये भी अजीब इत्तेफ़ाक़ है कि सांसद जी के अति गोपनीय, शिकायती पत्र शासन प्रशासन की कार्यवाही से पहले ही सोशल मीडिया के माध्यम से प्रचारित और प्रसारित करके अनावश्यक मानसिक दबाव बनाये जाने का प्रयास दिखता है लेकिन पत्रकारों के अनेक संगठन और प्रभावशाली पत्रकार नेतागणों की चुप्पी देखते हुये कानूनी रुप से सांसद को विधिक नोटिस जारी किया गया परन्तु सांसद महोदय द्वारा किसी बिन्दु पर कोई जवाब न देकर सिर्फ पत्रकार की मान्यता को लेकर खतो किताबत की जंग जारी है।
मान्यता समिति के समस्त सदस्यों से अनुरोध है कि मान्यता नियमावली के प्रावधानों, नियमों और मानकों को नज़रअंदाज़ करके अगर मान्यता निर्गत की गई है तो समीक्षा बैठक की प्रथम पंक्ति में प्रकरण को रखते हुए मान्यता सूची में सुशोभित समस्त पत्रकारों की नियमानुसार जांच किया जाना जनहित और न्यायहित में अति आवश्यक है। लगभग 30 वर्षों के पत्रकारिता के सफर में 22 वर्षें से मान्यता प्राप्त पत्रकार होने के साथ साथ शासन-प्रशासन की खबरों को निरंतर कवरेज किये जाने के साक्ष्य सूचना विभाग की पत्रावली में उपलब्ध है। स्वतंत्र पत्रकार की मान्यता नवीनीकरण हेतु लेख ऐसे बहुसंख्यक समाचार पत्र जिनकी कुल प्रसार संख्या एक लाख से अधिक में नियमित प्रकाशित होते है, ऐसे में मा. सांसद की इच्छापूर्ती के लिये यदि समीक्षा आवश्यक है तो मा. सांसद के समस्त शिकायती पत्रों की तुलनात्मक जांच भी आवश्यक है।
मा. सांसद द्वारा किसी खबर को लिखे जाने के आधार पर मान्यता समाप्त किये जाने की धमकी देते हुए समाज को आईना दिखाती खबरों को रोके जाने का प्रयास किया जा रहा है तो पत्रकार सुरक्षा और हितों को ध्यान में रखते हुये सम्पूर्ण प्रकरण में नियमानुसार कार्यवाही किया जाना न्यायहित में अति आवश्यक है। सांसद महोदय द्वारा सहकारिता विभाग की ठेकेदार फर्म वीना ट्रेडर्स के सबंध में समाचार प्रकाशन किये जाने पर मान्यता समाप्त किये जाने हेतु पत्र जारी किये गये है जबकि नियमानुसार जिसके संबंध में खबरें प्रकाशित हुई हों, वो स्वयं प्रेस कौंसिल के माध्यम से या उचित धाराओं में कानूनी नोटिस देने के लिए स्वतंत्र है लेकिन सांसद जी द्वारा मान्यता समाप्त करने के लिए वीना ट्रेडर्स एवं फ़र्ज़ी मार्कशीट पर कार्यरत क्षेत्रीय प्रबंधक, राज्य भंडारण निगम के करोड़ो की घनराशि के घोटाले की खबरें लिखे जाने पर स्वयं ही मोर्चा खोला है। माननीय सांसद जी द्वारा पत्रकार की मान्यता समाप्त करने के पत्रों को दुष्टिगत करते हुये नियमों के अनुपालन में कार्य किया जाना न्यायहित में उचित प्रतीत होता है वरना समाज में आईना दिखाती खबरों को लिखने से न सिर्फ मान्यता प्राप्त पत्रकार डरेगा बल्कि एक नयी परम्परा का विकास होगा और कोई भी विधायक, सांसद समाचारों के प्रकाशन किये जाने पर मान्यता समाप्त करने हेतु शिकायती पत्र जारी करता रहेगा।
सभी आदरणीय सदस्य, पत्रकार साथी, मा. सांसद जी के इतिहास और भूगोल के साथ साथ उनके अंतरराष्ट्रीय स्तर के संबंधों से भली भांती परीचित ही है, ऐसे में कलमकार के लिए तुर्की की ज़िगाना पिस्तौल की बहुसंखयक गोलियों की आवश्यकता तो नहीं पड़ेगी, स्वाभिमानी कलमकार तो बदनामी की अल्पसंख्यक मात्रा में चलाई गई गोली से भी ढेर हो सकता है, फिर दर्जन भर पत्रों को लिखकर सिर्फ मान्यता समाप्ति की कार्यवाही क्यों चाहते हैं संासद सदस्य, यह बात समझ से परे है। हालांकि मीडिया या पत्रकार की परिभाषा सूचना विभाग द्वारा निर्गत पत्रकार मान्यता से नही निर्धारित की जा सकती परन्तु वर्षो की तपस्या और परिश्रम उपरांत मिलने वाला मान्यता का दर्जा पत्रकारों के लिए किसी भारत रत्न या वीर चक्र के समान गौरवशाली होता है और ऐसे निराधार शिकायती पत्रो पर कार्यवाही करना समाज को आईना दिखाती पत्रकारिता पर लगाम लगाने जैैसा होगा और भविष्य में किसी अनहोनी की सूरत में संसद सदस्य बृजभूषण शरण सिंह को नामित कर अग्रिम कार्यवाही की जाएगी।
सूचना एवं जनसंपर्क विभाग द्वारा मेेरे लिखित अनुरोध पर मान्यता समीक्षा की बैठक में प्रकरण को प्रस्तुत किये जाने की खबरों को एक खास वर्ग से जोड़े जाने के तमाम आरोप निराधर है क्योकि पारदर्शिता एवं नैसर्गिक न्याय के सिद्धांत के अनुपालन में क्रमवार सभी मान्यताओं की समीक्षा करने के उपरांत सूचना एवं जनसंपर्क विभाग की वेबसाइट पर समीक्षा में पाई गई त्रुटियां को दर्शाते हुए उनके निराकरण, निवारण हेतु उचित अवसर प्रदान करते हुए अंतिम निर्णय लिया जाना न्यायहित एवं पत्रकार हितों में उचित प्रतीत होता है।

 

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