ISI ने खड़ी कर रखी ‘हसीनाओं की फौज’, पाकिस्तानी महिलाओं के नापाक जाल में कैसे फंसते हैं भारतीय?
भारत के सुरक्षा और सामरिक महत्व की गोपनीय सूचनाएं हासिल करने के लिए पाकिस्तान का सबसे कारगर हथियार हनीट्रैपिंग मॉड्यूल है। इसके लिए तो पाकिस्तान ने न केवल बाकायदा हसीनाओं की फौज खड़ी कर रखी है बल्कि इसमें चीन के DeepSeek व हाईटेक वॉयस मॉड्यूलेटिंग सॉफ्टवेयर्स जैसे AI टूल्स तक का इस्तेमाल भी जमकर कर रहा है।
ऑर्डिनेंस फैक्ट्री फिरोजाबाद का कर्मचारी रविंद्र कुमार सूरी पाकिस्तान को गगनयान मिशन से जुड़ीं गुप्त सूचनाएं भेजने के आरोप में 14 मार्च 2025 को पकड़ा गया है। पूर्व में भी इस तरह के कई मामले सामने आ चुके हैं, क्योंकि पाकिस्तान लंबे समय से भारत की सुरक्षा में सेंधमारी के लिए हर हथकंडे अपना रहा है?
पाकिस्तान के हनीट्रैपिंग मॉड्यूल में AI का इस्तेमाल
भारत के सुरक्षा और सामरिक महत्व की गोपनीय सूचनाएं हासिल करने के लिए पाकिस्तान का सबसे कारगर हथियार हनीट्रैपिंग मॉड्यूल है। इसके लिए तो पाकिस्तान ने न केवल बाकायदा हसीनाओं की फौज खड़ी कर रखी है बल्कि इसमें चीन के DeepSeek व हाईटेक वॉयस मॉड्यूलेटिंग सॉफ्टवेयर्स जैसे AI टूल्स तक का इस्तेमाल भी जमकर कर रहा है।

पाकिस्तान के पास सामान्य सेना के साथ-साथ हनीट्रैपिंग मॉड्यूल में शातिर ‘हसीनाओं की फौज’ होने का अंदाजा इस बात से लगा सकते हो कि पाकिस्तान की गुप्तचर एजेंसी आईएसआई ने साल 2022 में ‘Project Lioness’ शुरू किया है। 3500 करोड़ के बजट वाले इस प्रोजेक्ट में भारतीय अधिकारियों-कर्मचारियों से गुप्त सूचनाएं निकालवाने के लिए 300 महिलाओं को भर्ती किया गया है।
पाकिस्तान के इन शहरों में बने कॉल सेंटर
मीडिया रिपोर्ट्स के अनुसार हनीट्रैपिंग मॉड्यूल के तहत काम करने वालीं हसीनाओं के लिए पाकिस्तान के खैबर पख्तूनख्वा, सिंध प्रांत, रावलपिंडी, कराची, इस्लामाबाद व लाहौर जैसे शहरों में कॉल सेंटर बने हुए हैं। रावलपिंडी में पाकिस्तान सेना के हेडक्वार्टर के पास स्थित फातिमा जिन्ना विमेन यूनिवर्सिटी में हनीट्रैपिंग मॉड्यूल के लिए चुनी गई महिलाओं को भारतीय भाषाओं प्रमुख रूप से हिंदी, पंजाबी के साथ-साथ फर्राटेदार अंग्रेजी बोलने की ट्रेनिंग दी जाती है।
