बकलोल से वरिष्ठ पत्रकारों को मिली राहत, बकलोली के चलते प्रतिष्ठित व्हाट्सएप्प ग्रुप से दिया निकाल

वही अपराधी नावेद शिकोह, आसिफ जाफरी, शारिब जाफरी के खिलाफ भड़ास द्वारा की जा रही मुहिम का असर भी देखने को मिल रहा है और अनेक महिला संगठन आज़ादी की पूर्व संध्या पर सूचना एवं जनसंपर्क विभाग के बाहर महिला पत्रकार के उत्पीड़न के अपराधी नावेद शिकोह, आसिफ जाफरी और शारिब जाफरी का पुतला फूंकने के लिए संगठित होकर आंदोलन करने की रणनीति पर काम कर रहे है।

हॉकर के झांसे में आकर बकलोली पड़ी महंगी


भड़ास ने कुछ दिन पहले समाचार प्रकाशित किया था कि बकलोल को लोकभवन, सचिवालय तथा पत्रकारों के लिए बने महत्वपूर्ण प्रेस रूम से प्रतिबंधित करने के लिए अनेक पत्रकार लामबंद हो गए हैं । उक्त निर्णय से घायल बकलोल किसी तरीके से उच्च अधिकारियों के कक्ष में घुस गया लेकिन वहां भी उसको मुंह की खानी पड़ी और अधिकारी द्वारा दो टूक जवाब देने पर बकलोल मुंह लटकाए बाहर निकला लेकिन अपनी फितरत कहाँ बाज आने वाला था और सूचना विभाग के गेट पर शाम तक बैठा रहा और अपनी बकलोली करता रहा जिसके चलते सूचना एवं जनसंपर्क विभाग के अधिकारी एवं कर्मचारियों द्वारा बकलोल को किसी भी कक्षा या किसी भी अधिकारी के सम्मुख न बैठाये जाने की हिदायत दी गई है।

एस. पण्डित

भड़ास की खबरों का असर लगातार दिखता जा रहा है, जिस तरह से भड़ास द्वारा मीडिया जगत को कलंकित करने वाले तथाकथित पत्रकारों के खिलाफ मुहिम छेड़ी थी और उनके संबंध में महत्वपूर्ण तथ्यों और साक्ष्यों के साथ समाचार प्रकाशित किए गए थे उसका असर देखने को मिल रहा है।

भगोड़े दंपति संजय पूरबिया और दिव्या श्रीवास्तव द्वारा समाचार पत्र की आड़ में किए जा रहे ब्लैकमेलिंग, धनउगाही, फर्जीवाड़ा और रंगदारी के सिलसिले में अनेक समाचार प्रकाशित किए गए थे जिनके परिणाम देखने को मिल रहा है कि माननीय उच्च न्यायालय द्वारा भगोड़े दंपति को किसी भी तरह की राहत देने से इनकार कर दिया और उनके द्वारा न्यायालय के सम्मुख किए गए फर्जीवाड़ा के संबंध में जवाब तलब किया गया है।

भोजपुरी फिल्मों के हीरो , निर्माता को मिला मुख्यालाय मान्यता प्राप्त पत्रकार का दर्जा

भोजपुरी फिल्मों के निर्माता निर्देशक और आपराधिक मामलों में नामित शशि नाथ दुबे का सूचना निदेशक को खुला चैलेंज !

वही अपराधी नावेद शिकोह, आसिफ जाफरी, शारिब जाफरी के खिलाफ भड़ास द्वारा की जा रही मुहिम का असर भी देखने को मिल रहा है और अनेक महिला संगठन आज़ादी की पूर्व संध्या पर सूचना एवं जनसंपर्क विभाग के बाहर महिला पत्रकार के उत्पीड़न के अपराधी नावेद शिकोह, आसिफ जाफरी और शारिब जाफरी का पुतला फूंकने के लिए संगठित होकर आंदोलन करने की रणनीति पर काम कर रहे है।

“एक परिवार अनेक समाचार पत्रों” पर प्रतिबंध लगने के बाद बकलोल खोलेंगे अयोध्या में प्रसाद की दुकान

भड़ास की खबरों के चलते जो अपराधी पत्रकारिता के भेष में खुले आम सूचना एवं जनसंपर्क विभाग के निदेशक के कमरे के बाहर मंडराते रहते थे और खुद को पत्रकार हिने की दलील देते थे अब सूचना एवं जनसंपर्क विभाग को ऐसे अपराधियों से निजात मिल गई है, वही भड़ास की खबरों का असर ऐसा हुआ कि बकलोल अपनी मानसिक संतुलन खो बैठा और व्हाट्सएप ग्रुप पर बटलर पैलेस निवासी मान्यता समिति के अध्यक्ष को बीमार बताने लगा जिसके चलते सम्मानित पत्रकारों के व्हाट्सएप ग्रुप से बकलोल को बाहर कर दिया गया है।

प्रसाद की दुकान खोलने से पहले बकलोल चुनावी मैदान में दिखाएगा अपनी बकलोली

बकलोल पत्रकार को लोक भवन और सचिवालय प्रवेश से प्रतिबंधित करने के लिए लामबंद हुए पत्रकार

भड़ास ने कुछ दिन पहले समाचार प्रकाशित किया था कि बकलोल को लोकभवन, सचिवालय तथा पत्रकारों के लिए बने महत्वपूर्ण प्रेस रूम से प्रतिबंधित करने के लिए अनेक पत्रकार लामबंद हो गए हैं । उक्त निर्णय से घायल बकलोल किसी तरीके से उच्च अधिकारियों के कक्ष में घुस गया लेकिन वहां भी उसको मुंह की खानी पड़ी और अधिकारी द्वारा दो टूक जवाब देने पर बकलोल मुंह लटकाए बाहर निकला लेकिन अपनी फितरत कहाँ बाज आने वाला था और सूचना विभाग के गेट पर शाम तक बैठा रहा और अपनी बकलोली करता रहा जिसके चलते सूचना एवं जनसंपर्क विभाग के अधिकारी एवं कर्मचारियों द्वारा बकलोल को किसी भी कक्षा या किसी भी अधिकारी के सम्मुख न बैठाये जाने की हिदायत दी गई है।

बकलोल पत्रकारिकता से दूषित हो रही उत्तर प्रदेश की पत्रकारिता, बकलोल पत्रकारों की खुफिया जानकारी जुटाने के लिए सक्रिय हुआ सूचना विभाग

सूत्रों की माने तो हॉकरिया पत्रकार के समझाने बुझाने पर बकलोल उल्टा सीधा लिखता है और हॉकर ने बकलोल की मानसिक बीमारी हैक कर लिया है, जब चाहता है बकलोल को अपने हिसाब से इधर-उधर फेंकता रहता है। दूसरों के घरों में अखबार फेंकने की कला में पारंगत हॉकरिया पत्रकार बकलोल को दूसरों के ऊपर निशाना साधकर फेंकने में इस्तेमाल कर रहा है। बकलोल के करीबियों की माने तो जिस तरह से बकलोल का इस्तेमाल किया जा रहा है और चुनावी दावेदारी में उसको अध्यक्ष के रूप में जीता हुआ बताया जा रहा है उससे एक बार फिर मानसिक आघात लग सकता है और अयोध्या में प्रसाद खोले जाने की दुकान पर ग्रहण लग जाएगा और सरयू नदी के किनारे बकलोल खुद को पत्रकारों का अध्यक्ष बताते हुए विक्षिप्त अवस्था मे घूमता नजर आएगा।

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