वामपंथी, अर्बन नक्सली और हिडमा समर्थक: DU में जिस भीड़ ने ‘ब्राह्मण’ पहचान देखकर पत्रकार रुचि तिवारी पर किया हमला, जानिए उसमें कौन-कौन लोग थे शामिल
ऑल इंडिया फोरम फॉर इक्विटी से जुड़े मुख्य सदस्यों का बैकग्राउंड विवादित है। इस मंच के सदस्यों मेंडॉ जितेंद्र मीणा, डॉ लक्ष्मण यादव, महेश चौधरी और भंवर मेघवंशी जैसे अर्बन नक्सल विचारधारा वाले लोग शामिल हैं। इसके अलावा इस फोरम से वामपंथी छात्र और खुद को सामाजिक संगठन बताने वाली ऑर्गनाइजेशन भी हैं।
दिल्ली विश्वविद्यालय के नॉर्थ कैंपस में शुक्रवार (13 फरवरी 2026) को प्रो-यूजीसी प्रदर्शन के दौरान स्थिति उस समय बिगड़ गई, जब एक महिला पत्रकार पर भीड़ ने हमला कर दिया। ‘ब्रेकिंग ओपिनियन’ नाम के यूट्यूब चैनल से जुड़ी पत्रकार रुचि तिवारी आर्ट्स फैकल्टी परिसर में प्रदर्शन कवर करने पहुँची थीं। आरोप है कि SC-ST-OBC एक्टिविस्ट्स और वामपंथी छात्र संगठनों से जुड़े प्रदर्शनकारियों ने उन्हें घेर लिया और मारपीट की।
13 फरवरी को यह प्रदर्शन SFI (भारतीय छात्र संघ), AISA (अखिल भारतीय छात्र संघ) और ऑल इंडिया फोरम फॉर इक्विटी जैसे वामपंथी छात्र संगठनों की ओर से आयोजित किया गया था। प्रदर्शनकारी, विश्वविद्यालय अनुदान आयोग (UGC) की 2026 की उच्च शिक्षण संस्थानों में समानता को बढ़ावा संबंधी नियमावली को लागू करने की माँग कर रहे थे, जिसे सुप्रीम कोर्ट ने फिलहाल स्थगित कर रखा है। इस नियमावली को लेकर विवाद इसलिए खड़ा हुआ है क्योंकि इसमें जातिगत हिंसा के पीड़ितों की श्रेणी को केवल SC, STऔर OBC तक सीमित रखने की बात कही गई है, जिससे सामान्य वर्ग को बाहर रखा गया है।
इसी बीच जब रुचि तिवारी वहाँ रिपोर्टिंग कर रही थीं, तो करीब 50-100 लोगों की भीड़ ने उन्हें घेर लिया। आरोप है कि उनका उपनाम ‘तिवारी’ सुनते ही कुछ लोगों ने चिल्लाकर कहा, “ये ब्राह्मण है, इसको पकड़ो।” एक वीडियो में कुछ लोग- मारो इसको, पता चलेगा और कोई बोल न देना यहाँ, काट के फेंक देंगे जैसी धमकी भरी बातें करते सुनाई दे रहे हैं। यह भी कहा गया कि उनके आने से पहले तक प्रदर्शन शांतिपूर्ण था।
सोशल मीडिया पर वायरल हो रहे कई वीडियो में देखा जा सकता है कि भीड़ ने उन्हें चारों तरफ से घेर लिया, धक्का-मुक्की की, मारपीट की और उनके कपड़े तक खींचने की कोशिश की। इस घटना ने कैंपस की सुरक्षा व्यवस्था और छात्र राजनीति में बढ़ते तनाव पर गंभीर सवाल खड़े कर दिए हैं।
रुचि तिवारी ने बताया कि कैसे UGC समर्थकों की भीड़ ने ब्राह्मण होने की वजह से उन्हें निशाना बनाया
एक वीडियो में रुचि तिवारी ने खुद पूरी घटना बयान की। उन्होंने बताया कि जब वह प्रदर्शन स्थल पर एक अन्य रिपोर्टर से बात कर रही थीं, तभी अचानक बड़ी संख्या में पुरुष और महिलाएँ उनके पास आकर उन्हें घेरने लगीं।
रुचि के अनुसार, वहाँ मौजूद जाति आधारित एक्टिविस्ट्स ने आरोप लगाया कि वह वही महिला हैं जो एक दिन पहले जंतर-मंतर पर भी मौजूद थीं। इसके बाद भीड़ ने बिना कुछ सुने उन पर हमला कर दिया और धक्का-मुक्की व मारपीट शुरू कर दी।
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रुचि तिवारी ने अपने बयान में बताया, “उन्होंने मेरे हाथ पकड़े, गर्दन दबोची, बाल खींचे और गला घोंटने की कोशिश की।” उनका कहना है कि जब उनके साथ आए सहयोगियों ने बीच-बचाव करने की कोशिश की, तो भीड़ में शामिल पुरुषों और महिलाओं ने उनके साथ भी मारपीट की। इतना ही नहीं, उन पर झूठा आरोप लगाया गया कि वे महिला प्रदर्शनकारियों को गलत तरीके से छू रहे थे।
रुचि के मुताबिक, किसी तरह हमलावरों से निकलकर जब वह सड़क की तरफ अपने साथियों को ढूँढने गईं, तो वहाँ भी उन्हें दोबारा घेर लिया गया। उन्होंने बताया कि करीब 100-150 लोगों की भीड़ थी, जिनमें कई महिलाएँ भी शामिल थीं। आरोप है कि भीड़ ने उनके साथ मारपीट की, उनके कपड़े फाड़ने की कोशिश की, जबकि कुछ लोग पूरी घटना के वीडियो बना रहे थे।
उन्होंने सवाल उठाया कि क्या यही नारीवाद है, जब एक महिला पर हमला हो रहा था और उसे बचाने के लिए कोई आगे नहीं आया। उनका आरोप है कि जब उनके कपड़े फाड़ने और उनके कपड़े उतारने की कोशिश की जा रही थी, तब भीड़ में मौजूद कई पुरुष वीडियो बना रहे थे।
रुचि तिवारी के समर्थन में उतरी ABVP
‘ब्राह्मण’ जाति को लेकर एक महिला पत्रकार को भीड़ द्वारा घेरकर प्रताड़ित किए जाने की घटना पर बढ़ते आक्रोश के बीच अखिल भारतीय विद्यार्थी परिषद (ABVP) ने रुचि तिवारी के समर्थन में खुलकर बयान दिया है। ABVP के दिल्ली प्रदेश सचिव सार्थक शर्मा ने वामपंथी छात्र संगठनों द्वारा किए गए हमले की कड़ी निंदा की।
सार्थक शर्मा ने समाचार एजेंसी ANI से बातचीत में कहा, “मैं कुछ बातें साफ करना चाहता हूँ। वामपंथी संगठन प्रदर्शन कर रहे थे और वहाँ एक महिला पत्रकार, जो यूट्यूब चैनल चलाती हैं, मौजूद थीं। वह प्रदर्शन को कवर कर रही थीं और उन्होंने कुछ सवाल पूछे। शायद उन्हें वे सवाल पसंद नहीं आए या फिर उन्हें वह महिला पत्रकार ही पसंद नहीं आई, इसलिए उन्होंने इस तरह का व्यवहार किया, वीडियो में साफ दिख रहा है कि उनके पुरुष कार्यकर्ता भी उन्हें थप्पड़ मार रहे थे, भीड़ उन्हें घेर रही थी और घसीटकर ले जाया जा रहा था। इससे साफ हो गया है कि ये लोग महिलाओं के साथ कैसा व्यवहार करते हैं।”


